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एसएसबी इंटरव्यू क्या है और कैसे होता है: 5 दिन की पूरी प्रक्रिया

एसएसबी इंटरव्यू यानी सर्विसेज़ सेलेक्शन बोर्ड का इंटरव्यू कोई एक लंबी बातचीत नहीं है। यह लगभग पांच दिन चलने वाली, दो चरणों की एक सधी हुई प्रक्रिया है, जिसमें तीन अलग-अलग मूल्यांकनकर्ता आपको परखते हैं कि आपमें अधिकारी बनने के गुण हैं या नहीं और आपको प्रशिक्षित किया जा सकता है या नहीं। यह वही चरण है जो लिखित परीक्षा के अच्छे अंकों को कमीशन में बदलता है।

इस पेज पर हम दिन-दर-दिन समझाएंगे कि एसएसबी इंटरव्यू कैसे होता है, कौन-से टेस्ट कब आते हैं, बोर्ड क्या देखता है और तैयारी कैसे करें। प्रक्रिया का ढांचा UPSC की एनडीए अधिसूचना और सेनाओं के अपने दस्तावेज़ों से लिया गया है। आपके अपने कॉल-अप लेटर में जो लिखा हो, वह हमेशा इस सामान्य वर्णन से ऊपर माना जाए।

एसएसबी क्या है और किसे देना पड़ता है?

एसएसबी थल सेना, नौसेना और वायुसेना में अफ़सर बनने के लिए व्यक्तित्व और बुद्धि की जांच है। एनडीए और सीडीएस के उम्मीदवार UPSC की लिखित परीक्षा पास करने के बाद बोर्ड में बुलाए जाते हैं। वायुसेना के बाक़ी प्रवेश AFCAT के बाद वायुसेना चयन बोर्ड (AFSB) जाते हैं। वायुसेना के चयन बोर्ड देहरादून, वाराणसी, गांधीनगर, मैसूरु और गुवाहाटी में हैं। देहरादून वाले बोर्ड के बारे में हमारा अंग्रेज़ी गाइड 1 AFSB Dehradun पढ़ा जा सकता है।

जो उम्मीदवार वायुसेना की फ़्लाइंग ब्रांच चुनते हैं और बोर्ड में अनुशंसित होते हैं, उन्हें अतिरिक्त रूप से कंप्यूटराइज़्ड पायलट सेलेक्शन सिस्टम (CPSS) परीक्षा देनी होती है। उसका दिन भी इसी पांच दिन के भीतर पड़ता है।

दो चरण और पांच दिन: ढांचा क्या है?

UPSC की अधिसूचना एसएसबी को दो-चरणीय चयन प्रक्रिया बताती है। चरण I में अधिकारी बुद्धि रेटिंग (OIR) परीक्षण और चित्र-बोध एवं विवरण परीक्षण (PP&DT) होते हैं, और इन दोनों के संयुक्त प्रदर्शन से छंटनी होती है। केवल चरण I पार करने वाले उम्मीदवार चरण II में जाते हैं। चरण II में इंटरव्यू, ग्रुप टेस्टिंग ऑफ़िसर (GTO) के कार्य, मनोवैज्ञानिक परीक्षण और कॉन्फ्रेंस होते हैं, जो अधिसूचना के अनुसार चार दिन में चलते हैं। पहला दिन और ये चार दिन मिलकर पांच दिन बनते हैं।

दिनक्या होता है
पहुंचने का दिनकॉल-अप लेटर में लिखे स्टेशन या गेट पर पहुंचना। रहने और खाने की व्यवस्था चयन केंद्र की ओर से होती है। सेना के एक कॉल-अप लेटर में लिखा है कि स्क्रीनिंग वाले दिन परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती, इसलिए सामान साथ रखें।
दिन 1चरण I: OIR और PP&DT। चुने गए उम्मीदवार आगे बढ़ते हैं, बाक़ी उसी दिन दोपहर को वापस भेज दिए जाते हैं।
दिन 2 से 5चरण II: मनोवैज्ञानिक परीक्षण, दो भागों में GTO कार्य, व्यक्तिगत इंटरव्यू और अंत में कॉन्फ्रेंस। परीक्षणों का क्रम केंद्रों और बैच के हिसाब से बदल सकता है।
उसके बादबोर्ड द्वारा अनुशंसित उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण। उसके बाद लिखित और एसएसबी अंकों से मेरिट सूची बनती है।

बोर्ड में अनुशंसित न होने पर उम्मीदवार कॉन्फ्रेंस के बाद घर लौटता है। अनुशंसित होने पर मेडिकल होता है और अंतिम मेरिट में लिखित व एसएसबी के अंक जुड़ते हैं।

दिन 1: OIR और PP&DT में क्या होता है?

OIR शाब्दिक और अशाब्दिक तर्कशक्ति के प्रश्नों का सेट है। इसमें स्कूल के विषय नहीं पूछे जाते। श्रृंखला, सादृश्य, वर्गीकरण और पैटर्न के प्रश्न शांति से और तेज़ी से करने का अभ्यास रखें।

PP&DT में पहले कुछ देर के लिए एक चित्र दिखाया जाता है। आप उसमें पात्रों की संख्या, उनका मूड और स्थिति नोट करते हैं, एक छोटी कहानी लिखते हैं, फिर समूह में उसे सुनाते हैं और चर्चा में हिस्सा लेते हैं। मूल्यांकनकर्ता आपकी सोच पढ़ते हैं: सकारात्मक नज़रिया, व्यावहारिक कदम और मुख्य पात्र की समझदारी भरी भूमिका। कई उम्मीदवार नाटकीय या निराशाजनक कहानी लिखकर अंक खो देते हैं। अभ्यास के लिए हमारा SSB प्रैक्टिस टूल देखें।

मनोवैज्ञानिक परीक्षण: लिखकर खुलता है आपका स्वभाव

मनोवैज्ञानिक आपको लिखित परीक्षणों से परखता है। इनमें आम तौर पर चार परीक्षण होते हैं। इन्हें चार अलग परीक्षा न मानकर एक जुड़ी हुई तस्वीर की तरह समझें।

  • TAT (थीमैटिक अपरसेप्शन टेस्ट): चित्रों की एक श्रृंखला पर कहानियां लिखनी होती हैं। कहानी में पात्र को कोई समस्या मिले और वह समझदारी से कदम उठाए।
  • WAT (वर्ड एसोसिएशन टेस्ट): एक-एक शब्द दिखता है और आपको पहला सकारात्मक, व्यावहारिक वाक्य लिखना होता है। यहां चतुराई से ज़्यादा गति और ईमानदारी मायने रखती है।
  • SRT (सिचुएशन रिएक्शन टेस्ट): रोज़मर्रा की और चुनौतीपूर्ण स्थितियां दी जाती हैं और आप लिखते हैं कि आप क्या करेंगे।
  • SD (सेल्फ़ डिस्क्रिप्शन): आप लिखते हैं कि माता-पिता, शिक्षक, दोस्त और आप ख़ुद आपको कैसा मानते हैं, और आप किसमें सुधार चाहते हैं।

चूंकि चारों परीक्षण एक ही मनोवैज्ञानिक पढ़ता है, इसलिए आपके जवाबों में विरोधाभास साफ़ दिखता है। अगर आप SD में लिखते हैं कि संकट में शांत रहते हैं, तो SRT के जवाबों में भी शांत कदम दिखने चाहिए।

GTO: खेल जैसे दिखने वाले, पर टीमवर्क परखने वाले कार्य

ग्रुप टेस्टिंग ऑफ़िसर आपको एक टीम में कार्य करते देखता है। ये कार्य खेल जैसे लगते हैं, पर इनमें योजना बनाने की क्षमता, सहयोग और नेतृत्व परखा जाता है। इनमें आम तौर पर ग्रुप डिस्कशन, ग्रुप प्लानिंग अभ्यास, प्रोग्रेसिव और हाफ़ ग्रुप टास्क, लेक्चरेट, व्यक्तिगत बाधाएं, कमांड टास्क और अंतिम ग्रुप टास्क शामिल रहते हैं। निरीक्षण लगातार चलता है, कार्यों के बीच के खाली समय में भी। इसलिए सामान्य शिष्टाचार, चुस्ती और खुशमिज़ाज रवैया फ़ायदा देता है।

ग्रुप पर हावी होने की कोशिश न करें। जो उम्मीदवार ध्यान से सुनता है, व्यावहारिक सुझाव देता है, दूसरों का साथ देता है और समूह को निर्णय तक पहुंचने में मदद करता है, वह सबसे ज़्यादा बोलने वाले से बेहतर अंक पाता है।

व्यक्तिगत इंटरव्यू और कॉन्फ्रेंस

इंटरव्यूइंग ऑफ़िसर (IO) आपसे आमने-सामने बात करते हैं। बातचीत का आधार वह व्यक्तिगत सूचना प्रश्नावली (PIQ) है जो आप पहले दिन भरते हैं। इसलिए फ़ॉर्म की हर पंक्ति पर सवाल बन सकता है: स्कूल, परिवार, शौक़, खेल, सेना में क्यों जाना चाहते हैं और समसामयिक घटनाएं। अपने शब्दों में उत्तर दें और ऐसा कोई शौक़ या उपलब्धि न बताएं जिस पर आप बात न कर सकें।

कॉन्फ्रेंस में सभी मूल्यांकनकर्ता मिलकर हर उम्मीदवार पर चर्चा करते हैं। UPSC की अधिसूचना के अनुसार कॉन्फ्रेंस के अंक तीनों तकनीकों में आपके शुरुआती प्रदर्शन और बोर्ड के निर्णय के आधार पर दिए जाते हैं। इसके बाद उम्मीदवार को अनुशंसित (Recommended) या अनुशंसित नहीं (Not Recommended) घोषित किया जाता है।

बोर्ड असल में क्या देखता है?

बोर्ड अधिकारी-सुलभ गुण (Officer Like Qualities, OLQ) और आपकी प्रशिक्षण-योग्यता परखता है। इन गुणों में तर्कशक्ति, पहल, सहयोग, साहस और दबाव में स्थिर रहने की क्षमता आती है।

अधिसूचना का एक बिंदु बहुत महत्वपूर्ण है: हर परीक्षण का अलग वेटेज नहीं होता। इंटरव्यूइंग ऑफ़िसर, GTO और मनोवैज्ञानिक अंक तभी देते हैं जब वे सभी परीक्षणों में आपके प्रदर्शन को समग्र रूप से देख लें, और कॉन्फ्रेंस के अंक भी इन्हीं तीनों के आधार पर दिए जाते हैं। सबका वेटेज बराबर है। इसका मतलब है कि एक ख़राब टास्क से आपकी उम्मीद ख़त्म नहीं होती, और पांच दिन लगातार एक जैसा व्यवहार किसी एक शानदार टेस्ट से कहीं बेहतर काम करता है।

परीक्षालिखित परीक्षा के अंकSSB/इंटरव्यू के अंक
एनडीए और नेवल एकेडमी900 (गणित 300 + GAT 600)900
सीडीएस: IMA, नौसेना अकादमी, वायुसेना अकादमी300300
सीडीएस: ऑफ़िसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई200200

एसएसबी पर क्या साथ ले जाएं?

हर सेवा और हर साल की सूची थोड़ी अलग होती है। कॉल-अप लेटर की सूची पंक्ति-दर-पंक्ति मानें। आम तौर पर ये चीज़ें लगती हैं:

  • कॉल-अप लेटर और वैध फ़ोटो पहचान-पत्र।
  • मैट्रिक का मूल प्रमाणपत्र (जन्म तिथि के लिए) और 12वीं का मूल प्रमाणपत्र। स्नातक उम्मीदवारों को डिग्री के काग़ज़ भी, और फ़ोटोकॉपी वैसे जैसे पत्र कहे।
  • पासपोर्ट आकार की फ़ोटो। नौसेना की सूचना में दस, सेना के एक कॉल-अप लेटर में बीस मांगी गई थीं, इसलिए संख्या अपने पत्र में देखें।
  • GTO कार्यों के लिए सफ़ेद शॉर्ट्स, टी-शर्ट और स्पोर्ट्स शूज़, और इंटरव्यू के लिए सादे औपचारिक कपड़े।
  • लिखने का सामान, ताला-चाबी और ज़रूरी प्रसाधन। नक़दी बहुत कम रखें और कीमती सामान न ले जाएं। मोबाइल फ़ोन केंद्र पहुंचने पर जमा करा लिया जाता है।

यात्रा के बारे में UPSC की अधिसूचना कहती है कि किसी विशेष कमीशन के लिए पहली बार एसएसबी में जाने वाला उम्मीदवार तृतीय श्रेणी एसी रेल किराये या उसके बराबर बस किराये का हक़दार है। टिकट सँभालकर रखें।

आख़िरी 90 दिन में कैसे तैयारी करें?

  1. बुनियाद पक्की करें। PIQ को अभ्यास के तौर पर ईमानदारी से भरें और फिर इंटरव्यूअर की नज़र से पढ़ें। हर प्रविष्टि के बारे में बोलने के लिए तैयार रहें।
  2. रोज़ लिखित मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का अभ्यास करें। हर हफ़्ते दस TAT-जैसी कहानियां और WAT-SRT के जवाब लिखें, फिर उन्हें सकारात्मकता, कार्रवाई और संगति के लिहाज़ से जांचें।
  3. समूह में काम करें। GTO अकेले नहीं सीखा जा सकता। दोस्तों के साथ चर्चा और योजना के अभ्यास करें, ताकि सुनना और साथ देना आदत बन जाए।
  4. शारीरिक रूप से चुस्त रहें। दौड़, पुश-अप और थोड़ी तैराकी पांच दिन की सक्रियता में ताज़ा रखती है।
  5. ख़बरें पढ़ें। बोर्ड से कम से कम कुछ हफ़्ते पहले रोज़ राष्ट्रीय और रक्षा ख़बरें पढ़ें, क्योंकि इंटरव्यू में देश की घटनाओं पर सवाल आते हैं।
  6. मॉक बोर्ड लें। किसी ऐसे व्यक्ति से फ़ीडबैक के साथ पूरा अभ्यास करें जो उम्मीदवारों का आकलन कर चुका हो।

अगर आपके पास एसएसबी का कॉल-अप आ चुका है या आने वाला है, तो GS India Defence Academy, देहरादून में 12 दिन और 1 महीने के SSB बैच हैं, हॉस्टल के साथ या उसके बिना। बैच और फीस के बारे में +91 70170 31757 पर फ़ोन या WhatsApp करके मुफ़्त काउंसलिंग ले सकते हैं, और फीस का ब्योरा फीस स्ट्रक्चर पेज पर देख सकते हैं।

वे ग़लतियां जो उम्मीदवारों को महंगी पड़ती हैं

  • अलग-अलग परीक्षणों में अलग-अलग व्यक्तित्व लिखना।
  • इंटरव्यू में किताबी जवाब देना, अपने अनुभव से बोलने की जगह।
  • समूह पर हावी होना, उसे निर्णय तक पहुंचाने की जगह।
  • दस्तावेज़ों की तैयारी अधूरी रखना, जिससे परीक्षण शुरू होने से पहले ही अवसर चला जा सकता है।
  • "अनुशंसित नहीं" को फ़ैसला मान लेना। इसे अपनी प्रोफ़ाइल पर फ़ीडबैक मानकर सबसे कमज़ोर हिस्से पर काम करें।
स्रोत और आधिकारिक लिंक

एसएसबी इंटरव्यू पर आम सवाल

FAQs

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एसएसबी इंटरव्यू कितने दिन चलता है?

सेना के कॉल-अप लेटर के अनुसार परीक्षण पहुंचने के दिन को छोड़कर पांच दिन चलता है और दो चरणों में बंटा है। वायुसेना और नौसेना के बोर्ड में भी लगभग ऐसा ही ढांचा होता है, पर अंतिम बात आपके कॉल-अप लेटर में लिखी होती है।

पहले दिन छंट जाऊं तो क्या होता है?

चरण I में नहीं चुने गए उम्मीदवारों को उसी दिन दोपहर में केंद्र से वापस भेज दिया जाता है, जैसा सेना के कॉल-अप लेटर में लिखा है। यात्रा भत्ते के नियम अधिसूचना में हैं।

क्या एसएसबी में हर टेस्ट के अलग अंक होते हैं?

नहीं। UPSC की अधिसूचना के अनुसार हर परीक्षण का अलग वेटेज नहीं होता। मूल्यांकनकर्ता सभी परीक्षणों में समग्र प्रदर्शन देखकर अंक देते हैं।

एसएसबी में सबसे ज़रूरी दस्तावेज़ कौन-से हैं?

कॉल-अप लेटर, फ़ोटो पहचान-पत्र, मैट्रिक का मूल प्रमाणपत्र और 12वीं का मूल प्रमाणपत्र या अंकपत्र। स्नातकों को डिग्री के काग़ज़ भी चाहिए, और बाक़ी सूची आपके पत्र में होती है।

क्या लड़कियां भी एसएसबी देती हैं?

हां। जिन प्रवेशों में महिलाएं पात्र हैं, उनमें वही चरण और वही प्रक्रिया होती है। UPSC की अधिसूचना पुरुष और महिला प्रवेश को अलग सूचियों में गिनती है।

क्या कोचिंग से एसएसबी में मदद मिलती है?

सही मार्गदर्शन आपको प्रारूप समझने और फ़ीडबैक के साथ कार्यों का अभ्यास करने में मदद देता है। आपकी अपनी ईमानदार तैयारी का विकल्प कुछ नहीं है, पर मॉक बोर्ड से कमज़ोरियां जल्दी दिख जाती हैं।

एसएसबी कितनी बार दे सकते हैं?

इसके लिए हर प्रवेश की अपनी शर्तें हैं। उम्मीदवार की आयु-सीमा और अवसरों की संख्या उसी भर्ती की अधिसूचना में लिखी होती है, इसलिए वहीं देखें।

देहरादून में एसएसबी की तैयारी के लिए GS India Defence Academy की SSB Training in Dehradun पेज देखें। कक्षाएं अकादमी में ही लगती हैं, ऑनलाइन बैच नहीं हैं, और बाहर से आने वाले उम्मीदवारों के लिए लड़कों और लड़कियों के अलग हॉस्टल व मेस हैं। अंग्रेज़ी में विस्तृत गाइड SSB Interview Process पर है।

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